Somnath Jyotirling : सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रकट होने की सम्पूर्ण कथा I

Somnath-Jyotirling

गुजरात के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र में वेरावल में स्थित भगवान् शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला सोमनाथ ज्योतिर्लिंग ( Somnath Jyotirling ) मंदिर है। यह गुजरात का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान और पर्यटन स्थल है। यहाँ पर देवो के देव महादेव शिव शंकर स्वयं प्रकट हुए थे और चन्द्रदेव को प्रजापति दक्ष के द्वारा मिले शाप से मुक्त किया था I

Somnath Jyotirling की पौराणिक कथा :

सृष्टि के आरम्भ में जब ब्रम्हदेव ने संसार की रचना की तब वह अपनी बनायीं हुई सृष्टि को देखकर आनंदित हो रहे थे फिर एक समय उनके मन में अहंकार का भाव उत्पन्न हुआ जिसके कारण उस अहंकार से उनके पुत्र दक्ष का जन्म हुआ I जो बहुत ही अहंकारी स्वभाव का था I उसने अपने पिता ब्रम्हा जी को ही शाप दे दिया था कि उनके बनाये हुए संसार में कोई उनकी ही पूजा नहीं करेगा I

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Bramha Dev

चन्द्रमा को मिला शाप :

दक्ष ने अपनी 10 पुत्रियों का विवाह धर्म से करवाया और रोहिणी सहित अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव से बिना उनकी सहमती के करवा दिया था I चंद्रदेव केवल रोहिणी से प्रेम करते थे बाकी किसी भी अन्य पत्नियों से नहीं I जब इसकी जानकारी प्रजापति दक्ष को पता चली तो उसने चन्द्रमा को शाप देते हुए कहा कि ” तुझे अपने रूप पर बहुत अधिक अहंकार है न जा तेरी काया नष्ट हो जाएगी और तू कुष्ट रोग से ग्रसित हो जायेगा” I

इसी शाप के कारण चन्द्र देव कुष्ट रोग से ग्रसित हो गए I चंद्रदेव और उनकी पत्नी रोहिणी दुखी होकर ब्रम्हा जी के पास गए और प्रार्थना की तब ब्रम्हदेव ने उनको शिव जी की तपस्या करने के लिए कहा I उनकी बात मानकर दोनों ने शिव जी की तपस्या प्रारंभ की I एक दिन प्रसन्न होकर शिव जी ने उनको दर्शन दिए और चंद्रदेव का कुष्ट रोग ठीक कर दिया I चन्द्रमा को उसका रूप और काया वापस प्राप्त हो गयी I

शिव जी ने चन्द्रमा को वरदान दिया :

फिर शिव जी ने दोनों से कोई वरदान मांगने को कहा तब चन्द्रमा और रोहिणी ने शिव जी से प्रार्थना की कि प्रभु यहाँ हमने आपकी तपस्या की और हमें आपके दर्शन प्राप्त हुये और हमारे सभी दुखों का नाश हुआ I अतः हमारी आपसे प्रार्थना है की आप यही विराजमान हो जाये जिससे सभी आपके दर्शन कर पाए और आपका आशीर्वाद ले पाए I

शिव जी ने तथास्तु कहा और उसी शिवलिंग में विराजमान हो गए जिसकी तपस्या चंद्रदेव और रोहिणी कर रहे थे I शिव जी ने इसका नाम Somnath Jyotirling रखा जो शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला ज्योतिर्लिंग कहा गया I

Somnath jyotirling
शिवजी ने चंद्र देव को दिया वरदान

यह भी पढ़ें: धृतराष्ट्र ने ऐसा कौन सा पाप किया था जिसके कारण उसे महाभारत युद्ध में हुई अपने 99 पुत्रों की मृत्यु का दुःख प्राप्त हुआ?

इस लेख में हमने शिव जी के सबसे पहले Somnath Jyotirling के प्रकट होने की कथा का उल्लेख किया है। जिसे हमारे ग्रंथों और वेद-पुराणों के आधार पर बताया गया है I आपको यह सच्ची कथा कैसी लगी हमे कॉमेंट करके बता सकते हैं।

One Comment on “Somnath Jyotirling : सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रकट होने की सम्पूर्ण कथा I”

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